वृद्धाश्रम - Hindi Social Story

17 Apr 2020
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एक गांव में रामलाल नामक एक रिटार्यर्ड व्यापारी  रहा करते थे ! उनके पत्नी का निधन हो गया था इसलिए व्यापार का सब कारोबार बेटे विजय को सौपकर रामलाल पोते के साथ अपना समय गुजरा करता था ! यही उसका दिनक्रम था !

अचानक एक दिन उनकी तबियत खरब हो गयी तो डॉक्टर के पास गए ,,साथ बीटा भी था !

डॉक्टर " इस  बीमारी का इलाज है पर ये छूट की बीमारी नहीं है ! इसलिए ज्यादा टेंशन न ले "

फिर भी उनके बेटे और बहु का व्यवहार उनके प्रति बदल गया था ! पोते को भी उनसे मिलने नहीं दिए जा रहा था ! भोजन भी नौकर के हाथ उनके कमरे में भिजवाया जाने लगा !

रामलाल सोचने लगे " हे भगवान, क्या फायदा ऐसे जिंदगी का ? इतनी मेहनत से खड़ा किया व्यापार का साम्राज्य , बंगला ,गाडी ,नौकर चाकर बैंक बॅलन्स सब बेकार है ।!,,,,इससे अच्छा मुझे तुम्हारे पास बुला लो!!! " और वो रोने लगे !

रोते रोते ही उनके कान पर बहु और बेटे के शब्द पड़े !

बहु बोल रही थी " देखो जी , मैं समझ सकती हु की पिताजी की बीमारी छूत की नहीं है ! पर मैं हमारे परिवार के बारे में कोई भी रिस्क नहीं लेना चाहती ! इसलिए उन्हें कोई वृद्धाश्रम में भर्ती करवा दो !  और हम भी कभी कबार उनसे मिलने जाते रहेंगे ! ,,,आप पिताजी से जल्द बात करो "

"तुम सही कह रही हो ,,,ऐसेभी पिताजी अब बूढ़े हो गए है ! उनका कोई फायदा नहीं यहाँ ! मैं  कल ही उनसे बात करता हु "

ये शब्द सुनकर तो रामलाल की आँखे नाम हो गयी ! वो रोने लगे ! जिस बेटे को बड़े लाड प्यार से बड़ा किया ,काबिल बनाया आज वही बेटा उनके बारे में ऐसा कह रहा था ! वो बहुत दुखी हुए ! बहुत देर सोचने के बाद वे एक नतीजेपर पहुंचे ! 

फिर अगले दिन सुबह उनका बेटा राजेश गर्दन निचे करते हुआ उनके कमरे में आया !

रामलाल ने पूछा " आओ बेटा , आज इधर कैसे चले आये , क्या कोई परेशानी है ? बताओ मुझे ?"

"जी पिताजी ,मुझे आपसे कुछ कहना है " राजेश सर झुकाते हुआ बोला 

"अरे व्वा ! मुझे भी तुमसे कुछ कहना है बेटा ,,अच्छा हुआ तुम ही मेरे पास आ गए ! बोलो बोलो क्या बात है बेटा ?"

" जी पिताजी पहले आज बताइये की क्या कहना चाहते थे मुज़से " राजेश ने पूछा !

" बात यह है बेटा की , जब डॉक्टर ने ही मेरी बिमारी खतरनाक बताई है तो मैं चाहता हु की मेरी बची कुची  जिंदगी अब अपने जैसे असाहय,

बेसहारा बुजर्गो के साथ बिताऊ: ये कहते हुए उनकी आँखों में आंसू आ गए !

ये सुनते ही राजेश मन ही मन खुश हुआ ! क्योकि पिताजी ने स्वयं आगे रहकर ये बात कही इसलिए उसे अपराधी मुक्त लगने लगा !

लेकिन दिखावे के लिए उसने पिता से कहाँ " यह आप क्या कह रहे हो पिताजी ? भला यहाँ रहने में आपको क्या तकलीफ है ?"

 

"नहीं बेटे ,मुझे यहाँ रहने में कोई तकलीफ नहीं , लेकिन यह बताने में तकलीफ हो रही है की तुम और तुम्हारा परिवार अब रहने की व्यवस्था अन्यत्र कर लो ,,,,मैंने इस घर को वृद्धाश्रम ' बनाने का फैसला कर लिया है ! ताकि अपनी बची हुई जिंदगी  आराम से उन पीड़ितों के साथ बिता सकू ,,,,,,,,अरे हां ,,,,तुम भी तो कुछ कहना चाहते थे न ?"

 

राजेश निशब्द हो गया !

 

दोस्तों ,कमेंट बॉक्स में बताइये के रामलाल ने सही किया या गलत ! ,,,दोस्तों , हमारे समाज के हर घर में बुजर्गो को इस परिस्थिति का सामना कर पड़ रहा है ! हम बुजर्गो को बेकार चीज समझ कर उन्हें हमसे दूर कर है ! कौनसे समाज में हम जी रहे है जहा बुजर्गो को सम्मान न हो !

जिस घर में बुजुर्ग व्यक्ति न हो वो घर ,घर नहीं लगता ! बुजुर्गो को कठिन परिस्थिति में छोड़कर आखिर हम क्या पाना चाहते है? आपसे विनती है की बुजर्गो का ख्याल रखे ,,उनका सम्मान करे !।

 ।।धन्यवाद् !

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