सैनिक का त्याग

30 Mar 2020
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फौजी विक्रम और जंग की दास्ताँ 

ये कहानी एक फौजी विक्रम की, विक्रम अपने माता पिता का एकलौता बेटा था...! विक्रम के घर की आर्थिक स्तिथि ज्यादा ठीक नहीं थी... लेकिन विक्रम की फ़ौज में नौकरी लगने के बाद सब कुछ ठीक हो गया था...! विक्रम की माँ ने बाबूजी से कहा...! सुनिये जी अब हमारे बेटे की नौक्ररी लग चुकी है... मेरा ख्याल है की अब उसकी शादी कर देनी चाहिए...! बाबूजी --- हां तुम ठीक कहती हो...! मैं कल ही यसवंत जी से उनकी बेटी रश्मि से अपने बेटे के रिश्ते की बात करता हूँ...! वो भी तो फ़ौज से अभी रिटायर हुए है...! उनकी बेटी रश्मि खुबसूरत और समझदार है हमारे बेटे के लिए बिकुल ठीक रहेगी...! पत्नी --- हां ये ठीक रहेगा दोनों एक दुसरे को बचपन से जानते है...! विक्रम और रश्मि की शादी तय हो जाती है...! और थोड़े ही दिनों में विक्रम और रश्मि की शादी हो जाती है...! इस शादी से दोनों ही परिवार खुश था ...! रश्मि और विक्रम दोनों एक दुसरे से बहोत प्यार करते थे दोनों... दोनों के लिए एक दुसरे से दूर रहना आसान नहीं था...! विक्रम अपने ड्यूटी में वापस चला गया...! इधर विक्रम के माँ की तबियत भो कुछ ठीक नहीं रहती थी.. और विक्रम जितने पैसे भेजता वो घर खर्च के लिए कम ही पड़ते...! विक्रम अपनी माँ से हर रोज फ़ोन पे बाते किया करता और अपने नए दोस्त शेखर में बारे में बताता...! एक दिन विक्रम का फ़ोन आया !  विक्रम –- माँ प्रणाम... कैसी हो और बाबु जी कैसे है...! माँ – बेटा हम सब अच्छे है... तू ठीक तो है न...! विक्रम -- हां माँ मैं ठीक हूँ... माँ मुझे एक बहोत अच्छा दोस्त मिला है शेखर....मेरा बहोत ख्याल रखता है...!  माँ – भगवान् तुम दोनों को खुश और सलामत रखे...! विक्रम -अच्छा माँ मुझे अब जाना होगा मैं जल्द ही छुट्टी में वापस आऊंगा और आपसे बाद में बात करता हूँ...! माँ – ठीक है बेटा अपना ख्याल रखना..! उसके बाद कई महीनो तक विक्रम का कोई फ़ोन नहीं आया...! उसने अपने माँ से ये बात छुपायी की वो जंग के लिए जा रहा है....! कई महीनो तक विक्रम का कोई फ़ोन नहीं आया  उसकी माँ और बाकी घर वाले सभी बहोत परेशान थे...! एक  दिन विक्रम का फ़ोन आया... वो आवाज से काफी दुखी लग रहा था...! माँ -  बेटा कैसा है तू वहां सब ठीक तो है न...! विक्रम – हां माँ मुझे छुट्टी मिली है मैं कुच्छ ही दिन में घर जाऊंगा... माँ वो...! माँ – हा बेटा बोल..! “विक्रम – माँ मुझे आपसे एक बात पूछनी है. मेरा एक दोस्त है शेखर, जिसे मैं अपने साथ घर लाना चाहता हूँ. क्या मैं उसे ला सकता हूँ?” माँ -- “बिल्कुल बेटा, ये भी कोई पूछने की बात है.! विक्रम – माँ  बात ये है की “ शेखर  “युद्ध में बहुत बुरी तरह घायल हो गया है. बम फटने के कारण उसने अपना एक हाथ और पैर गँवा दिया है. उसके पास कोई जगह नहीं है, जहाँ वो जा सके, इसलिये मैं उसे अपने साथ रहने के लिए लाना चाहता हूँ.”...! माँ बोली,--- “बेटा तुम्हारे दोस्त के बारे में जानकर हमें बहुत दुःख हुआ. मैं तेरे बाबूजी से कह कर उसके रहने के लिए कही जगह तलाश करवा दूंगी ! “नहीं माँ  मैं चाहता हूँ कि वो हमारे साथ ही हमारे घर में रहे. हमेशा के लिए ”! विक्रम के बाबूजी -- “हेलो बेटा, ये “कहना बुरा होगा लेकिन एक अपाहिज व्यक्ति हमारे लिए कितना बड़ा बोझ होगा. तुम समझ सकते हो...! हम पहले ही कितनी मुशीबत से गुजर रहे है... ! भगवान् ने उसके लिए जरुर कुछ सोचा होगा...! पर हम एक अपाहिज को सारी जिंदगी कैसे रख सकते है..! एक बार तुम बहू से बात कर लो...! विक्रम – हेलो रश्मि तुम्हारा क्या कहना है...! रश्मि – सुनिए जी माँ बाबूजी बिलकुल ठीक कह रहे है...! कुछ दिनों के लिए ठीक है पर... जिंदगी भर के लिए एक अपाहिज को अपने घर में रखना ठीक नहीं..! बाकी आप की मर्जी..! विक्रम- ठीक है... मैं तुमसे बाद में बात करता हूँ तुम सब अपना ख्याल रखना...! यह कह कर विक्रम ने फ़ोन रख दिया. कुछ दिनों बाद, उसके माता-पिता को कुछ दिनों बाद विक्रम के पिता को पुलिस से एक संदेश मिला. जिसमें लिखा था कि उनके बेटे विक्रम ने सुसाइड कर लिया है...! और अब वो इस दुनिया में नहीं है...! ये खबर सुन कर सब बहोत दुखी हुए...! सारा  परिवार विक्रम को देखने हॉस्पिटल पंहुचा...! जहा उसकी डेड बॉडी लायी गयी थी...!  जब उन्होंने विक्रम को देख तो सभी को बहोत बड़ा सदमा लगा...! विक्रम का एक हाथ और और एक पाँव नहीं था... वो पूरी तरह कट चूका था...! फ़ौज के एक सिपाही ने बताया की कुछ महीनो पहले ही जंग के दौरान ही विक्रम ने अपना एक हाथ और एक पाँव गवा दिया था...! और वो समझ चूका था की अब वो अपने परिवार के लिए कुछ नहीं कर पायेगा और सब के लिए बोझ बन कर रह जाएगा... इसलिए उसने सुसाइड कर लिया...! ताकि वो अपने माता  और पत्नी के लिए बोझ न बने...! जब पूरे परिवार को विक्रम के दोस्त वाली कही बात की सच्चाई का पता चला तो  पूरे परिवार को अपनी भूल का खूब पछतावा हुआ..! लेकिन तब तक बहोत देर हो चुकी थी...!  

 

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