सच्चा प्यार - Sachcha Pyar - Hindi Love Story

08 Mar 2020
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रोहित ने मुंबई के अपने इंजीनियरिंग  कॉलेज डे के फंक्शन के लिए  एक छोटे से ड्रामा एक्ट मे भाग लिया था। एक दिन उसने एक लड़की की मधुर आवाज में गाने की आवाज सुनी और वह उसी कमरे की तरफ मुड़ गया।
 उसने देखा एक खूबसूरत लड़की गाने की रिहर्सल कर रही थी। वह मंत्रमुग्ध होकर उस लड़की को देखते हुए गाना सुनने लगा। रोहित कुछ देर में वहां से लौट आया और कॉलेज के बाहर खड़ा हो गया। कुछ देर के बाद वह लड़की बाहर आने लगी।
 रोहित छिपकर उसे देख रहा था। रोहित ने आभा की हल्की मुस्कुराहट देखी और बात करने की पहल की। 

रोहित--आपने गाने में भाग लिया है ना?...
आभा---हां, और आपने? 
रोहित ----- एक ड्रामा कर रहा हूं।
सहेली ----- लड़के ड्रामा अच्छा कर लेते हैं!
रोहित ----- आप लोगों से सीखते हैं।
आभा ------लड़के क्या कम ड्रामेबाज होते हैं?
रोहित ----- मैं तो मजाक कर रहा था।
सहेली ----- हम लोग भी कहां सीरियसली बोल रहे हैं।

तीनों हंसने लगे। आभा मुस्कुरा कर चली गई।..दूसरे दिन रोहित ने भी सिंगिंग मे नाम देकर रिहर्सल शुरू कर दी। वे दोनों एक-दूसरे से घुलमिल गए।
इस तरह दोस्ती के बाद उनके प्यार की गाड़ी चल निकली। दोनों  का लास्ट सेम  एग्जाम खत्म हो गया था।अचानक रोहित के पापा का ट्रांसफर चेन्नई में हो गया!
दोनों प्रेमियों को हालात ने जुदा कर दिया।चेन्नई जाने के बाद रोज फोन का सिलसिला चलता रहा। वह रविवार का दिन था।
आभा सवेरे  रोहित के कॉल का वेट कर रही थी पर फोन नहीं आया तब उसने ही कॉल किया लेकिन रोहित का मोबाइल स्विच ऑफ बता रहा था। आभा ने बहुत कोशिश की पर नतीजा जीरो।
एक महीना दुख में बीत गया। एक दिन अचानक रोहित की मम्मी का काॅल आया।

रोहित की मम्मी (रोते हुए)---आभा बेटा.... मैं रोहित की मम्मी...
आभा --क्या हुआ मम्मी जी..आप रो क्यों रही हैं? मुझे जल्दी से बताइए! 
मम्मी --रोहित...
आभा --- क्या हुआ रोहित को? 
मम्मी--बेटा एक महीने पहले उसका एक्सीडेंट हो गया था, वह बच गया लेकिन चलने के काबिल न रहा!
आभा --मम्मी जी रोहित से मेरी बात कराइए।
मम्मी--बेटा वह ठीक से बात भी नहीं कर पाता है।ठीक हो जाए तो उसे लेकर मैं मुंबई आऊंगी।

एक महीने के बाद रोहित मम्मी के साथ मुंबई आ गया।आभा रोहित के घर पहुंच गई।रोहित को देखते ही आभा की आंखों में आंसू भर आए।रोहित दोनों पैर चादर से ढके हुए लेटा था।

रोहित-- हाय आभा! क ..कैसी हो?
आभा ---रोहित तुम्हारे बिना कैसी हो सकती हूं।
रोहित-- मैं अब चल नहीं..।आभा सब कुछ समझ चुकी थी।
मम्मी--बेटा, भगवान ने हमारी खुशियां हमसे छीन ली! इसकी जिंदगी का ..
आभा --मम्मी जी!मैं रोहित का साथ जिंदगी भर निभाऊंगी!
मम्मी
-- बेटा तुम्हारे सामने पूरी जिंदगी पड़ी है। सोच लो..
आभा--मैंने सब सोच लिया है।मुझे आपका आशीर्वाद चाहिए। 

आभा अपने घर चली आई। दूसरे दिन उसे रोहित का एक पत्र मिला। 

उसमें लिखा था---आभा, मुझे भूल जाओ! प्रैक्टिकल बनो, सिर्फ प्यार से जिंदगी नहीं चलती!मैं चल नहीं सकता, तुम्हारा साथ निभा नहीं सकता! तुम सुंदर हो जवान हो।
किसी अच्छे से लड़के से विवाह कर लो! मैं हमेशा के लिए तुमसे दूर जा रहा हूं। आभा,पत्र पढ़ने के बाद रोने लगी। वह अलग ही मिट्टी की बनी थी।

 उसका प्यार सच्चा था। उसने फैसला कर लिया था।उसके घर वाले उसके खिलाफ थे। आभा चेन्नई पहुंच गई। उसने रोहित का हाथ पकड़ लिया।अंत में उसके प्यार की जीत हुई और रोहित और आभा विवाह सूत्र में बंध गए।

आभा ने रोहित के अपंग होने के बावजूद उसके साथ विवाह करने का पक्का निर्णय ले लिया। उसने सच्चा जीवन साथी बनने का कर्तव्य निभाया और सब के लिए एक मिशाल बन गई।

तो दोस्तों आप कमेंट बॉक्स में बताइये की आभा ने सही किया या गलत ? अगर आप रोहित और आभा की जगह होते तो क्या करते ?

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