मनहूस काली लड़की - Hindi Emotional Story

01 Oct 2020
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एक गांव में अंजू नाम की लड़की अपनी माँ और पिता के साथ रहती थी ! वह दिखने में  बहुतही बदसूरत और काली थी ! पर उसे अपने बदसूरती  और कालेपन से जराभी अफ़सोस न था ! पढाई में भी कुछ खास नहीं पर हमेशा मस्त रहती थी ! और आने साथियो को हमेशा हंसाती थी !

 अंजू को एक शौक भी था , पेंटिंग बनाने का ! खूब मन लगाकर वह पेंटिंग बनाया करती ! अपने दोस्तों की, परिवार की हमेशा पेंटिंग बनती रहती ! पेंटिंग में उसने  अद्भुत और असाधारण प्रतिभा हासिल कर ली थी !

 पर उसके बदसूरती और कालेपन से उसे कोई प्यार न करता ! पर उसकी माँ हमेशा उससे प्यार करती ! आजतक कभी माँ ने उसे डांटा नहीं था ! और अंजू भी माँ से बहुत प्यार करती! 

 हर बार की तरह आज भी उनके घर शादी के लिए आये थे उन्होंने अंजू के पेंटिंग की बहुत तारीफ की पर लड़की को देखकर नाक मुँह सिकोड़कर चले गए !

 अंजू भी किसी को बिना बताये बहार चली गयी ! शाम को जब वह लौटी तो घर का मौहोल गरम था ! 

उसके पिता उसकी माँ से गुस्से से बात कर रहे थे  ' पता नहीं कौनसे पाप के बदले ये मनहूस लड़की पैदा हुई , हमारे तो करम ही फुट गए जो ऐसी लड़की तूने पैदा की '

 पिता के ऐसे ताने वह रोज सुनती पर उसपर कोई असर नहीं होता क्यों की यह हमेशा का था !

वह बहुत खुछ होकर माँ को कुछ बताने गयी ' माँ ,बड़ी भूख लगी है ,कुछ खाने को दे दो ना पहले "

 उसके हाथो में एक सर्टिफिकेट और चेक भी था ! पर माँ बहुत गुस्से में सबब्जी काट रही थी ! माँ ने अंजू की तरफ न देखते ही बोली

' तू सचमुच मनहूस है , काश पैदा होने से पहले ही तू मर जाती तो आज ये दिन नहीं देखने को मिलता ! पचासो रिश्ते आये तेरे लिए पर किसीने पसंद नहीं किया ! '

 अंजू को माँ से ऐसी आशा नहीं थी , उसका दिल बैठ गया ! और माँ से बोली ' क्या मै  सचमुच मनहूस हु ?'

माँ बोली ' हां ,तू सचमुच मनहूस है '

'माँ मेरी वजह से तुम्हे ताने झेलने पड़ रहे है ,क्या मै सचमुच मर जाऊ ?' अंजू ने पूछा '

 माँ ने गुस्से से कहा " हां मर जा , कम से कम हम चैन से तो जी सकेंगे ! '

 फिर अंजू वहासे चलकर अपने कमरे में गयी और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया !

 थोड़ी देर बाद जैसे ही माँ को अपनी गलती का एहसास हुआ तो वह दौड़ती हुई अंजू के कमरे के पास गयी !

माँ ने जोर की आवाज लगाई , पर दरवाजा नहीं खुला ! 

आवाज सुनकर अंजू के पिता भी वहां आये और जोर से पुकारे , पर अंदर से कोई 

 आवाज नहीं आयी  ! फिर पिताजी ने जोर का धक्का देकर  दरवाजा खोला तो सामने अंजू की लाश झूल रही थी ! 

 वही पर एक चिट्टी , सर्टिफिकेट और चेक रखा था !

 अंजू की माँ ने चिट्टी हाथ में ली , उसमे लिखा था ' माँ , मैंने आज तक तुम्हारी बात को कभी टाला नहीं है ! आज तुमने मरने को कहा तो वो भी बात मै मान रही हु ! अब तुम मनहूस ,बदसूरत और काली बेटी की माँ नहीं कहलाओगी !'

 माँ, मैंने पड़ने की बहुत कोशिश की पर मेरे दिमाग में कुछ जाता ही नहीं !  पर भगवन ने मुझे ऐसा बनाया उसमे मेरा क्या कुसूर ? 

मुझे सबने काली ,बदसूरत कहा पर मुझे कभी बुरा न ही लगा पर जब तुम्हारी मुँह से सुना तो बहुत बुरा लगा माँ ,,,और हां ,आज मुझे पेंटिंग कॉम्पिटिशन में फर्स्ट प्राइज और ५० हजार रुपये मिले और आर्ट गैलरी में नौकरी भी ! पर अफ़सोस ,,,,,,,,,,,,और पता है माँ , आज मेरी जिंदगी का सबसे ख़ुशी का दिन था क्युकी सबने मुझे वहां कहा था ' कितनी भाग्यशाली लड़की है '

 दोस्तों, आज भी हमारे समाज में  लोग गोरी काली भेद करते है , पर वे यह नहीं समझ पाते की असली खूबसूरती तो अंदरूनी होती है ! हमें कोशिश करनी चाहिए की उपरकी खूबसूरती को ना देख उसके टैलेंट और दिल को देखना चाहिए तभी अंजू जैसी लड़किया आत्मसन्मान से इस समाज में जी पायेगी ! आपकी क्या रे है ? कॉमेंट में जरूर बताइये !

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