महामारी | Hindi Social Issue Story that will Make you Cry

09 Apr 2020
206
मनोहरदास एक सफल व्यापारी थे ! उन्होंने सारा व्यापार अब बेटे मोहन के हांथो सौप दिया था ! मोहन की शादी हो चुकी थी और उसे एक बेटा भी था !

व्यापार के चलते वो देश विदेश यात्रा करते थे ! एक दिन उनकी तबियत अचानक बिगड़ गयी ! तेज बुखार के साथ-साथ वे सारे लक्षण दिखायी देने लगे जो एक कोरोना पॉजीटिव मरीज के अंदर दिखाई देते हैं ।

परिवार के सदस्यों के चेहरों पर खौफ़ साफ़ दिखाई पड़ रहा था । उनकी चारपाई घर के एक पुराने बड़े से बाहरी कमरे में डाल दी गयी जिसमें इनके पालतू कुत्ते *मोती * का बसेरा था  । 

मनोहरदास जी कुछ साल पहले एक छोटा सा घायल पिल्ला सड़क से उठाकर लाये थे और अपने बच्चे की तरह पालकर इसको नाम दिया *मोती* ।

इस कमरे में अब मनोहरदास जी , उनकी चारपाई और उनका प्यारा मोती था !।दोनों बेटे -बहु ने दूरी बना ली और बच्चे को भी पास ना जानें के निर्देश दे दिए गये । उनकी पत्नी भी उनके पास आने से डरने लगी !

सरकार द्वारा जारी किये गये नंबर पर फोन करके सूचना दे दी गयी । खबर मुहल्ले भर में फैल चुकी थी लेकिन मिलने कोई नहीं आया । कपडे से  मुँह लपेटे हुए, पड़ोस की कोई एक बूढी अम्मा आई और मनोहरदास  जी की पत्नी से बोली 

-"अरे कोई इसके पास दूर से खाना भी तो सरका दो , वे अस्पताल वाले तो इसे भूखे  ही ले जाएँगे उठा के" ।

अब प्रश्न ये था कि उनको खाना देनें के लिये कौन जाए । बहु ने खाना अपनी सास को पकड़ा दिया ! अब मोहनदास जी की पत्नी के हाथ , थाली पकड़ते ही काँपने लगे , पैर मानो खूँटे से बाँध दिये गए हों ।

इतना देखकर वह पड़ोसन बूढ़ी अम्मा बोली "अरी तेरा तो पति है तू भी ........। मुँह बाँध के चली जा और दूर से थाली सरका दे वो अपने आप उठाकर खा लेगा" । 

सारा वार्तालाप मोहनदास जी  चुपचाप सुन रहे थे , उनकी आँखें नम थी और काँपते होठों से उन्होंने कहा कि 

"कोई मेरे पास ना आये तो बेहतर है , मुझे भूख भी नहीं है" ।

इसी बीच एम्बुलेंस आ जाती है और मोहनदास जी को एम्बुलेंस में बैठने के लिये बोला जाता है । मोहनदास जी घर के दरवाजे पर आकर एक बार पलटकर अपने घर की तरफ देखते हैं । पोते की खिड़की से मास्क लगाए दादा को निहारते हुए और उसके पीछे सर पर पल्लू रखे उनकी  बहु दिखाई पड़ती हैं । और उनकी पत्नी काफी दूर,  मुँह की रुमाल बंधे खड़ी थी !

विचारों का तूफान मोहनदास जी के अंदर उमड़ रहा था । उनके पोते ने उनकी तरफ हाथ हिलाते हुए Bye कहा । एक क्षण को उन्हें लगा कि 'जिंदगी ने अलविदा कह दिया'

मोहनदास  जी की आँखें लबलबा उठी । उन्होंने बैठकर अपने घर की देहरी को चूमा और एम्बुलेंस में जाकर बैठ गये । उनकी पत्नी ने तुरंत पानी से भरी बाल्टी घर की उस देहरी पर उलेड दी जिसको मोहनदास  चूमकर एम्बुलेंस में बैठे थे ।

इसे तिरस्कार कहो या मजबूरी , लेकिन ये दृश्य देखकर कुत्ता भी रो पड़ा और उसी एम्बुलेंस के पीछे - पीछे हो लिया जो मोहनदास  जी को अस्पताल लेकर जा रही थी ।

मोहनदास जी अस्पताल में 14 दिनों के अब्ज़र्वेशन पीरियड में रहे । उनकी सभी जाँच सामान्य थी । उन्हें पूर्णतः स्वस्थ घोषित करके छुट्टी दे दी गयी । जब वह अस्पताल से बाहर निकले तो उनको अस्पताल के गेट पर उनका कुत्ता मोती बैठा दिखाई दिया । दोनों एक दूसरे से लिपट गए । आंसू बांध तोड़ बह चले ।

 

जब तक उनका बेटा उन्हें  लेने पहुँचता तब तक वो अपने कुत्ते को लेकर किसी दूसरी दिशा की ओर निकल चुके थे ।उसके बाद वो कभी दिखाई नहीं दिये । 

आज उनके फोटो के साथ उनकी गुमशुदगी की खबर छपी है अखबार में लिखा है कि सूचना देने वाले को 50 हजार का ईनाम दिया जायेगा ।

वो फिर कभी नही मिले । 

दोस्तों , आजके हालात यही बयां कर रहे है ! इस वायरस के चक्कर में कौन अपना कौन पराया ? समझ नहीं आ रहा है ! इस वायरस ने कुछ लोगो जुदा किया तो कुछ लोगो को मिला दिया ! सब लोग अपने अपने घर में बैठकर उस दिन का इंतज़ार कर रहे है की कब इसपर इलाज निकलेगा ! पर तबतक हम आपसे विनती करते है की आप घर से बहार न निकले और एक दूसरे की फिक्र करे ! वायरस आते जाते रहेंगे पर इंसानियत का पता इसी संकट समय पता चलता है ! आपस में मिलकर रहिये और इस कठिनाईका सामना करे ! 

कैसी लगी ये कहानी कमेंट बॉक्स में जरूर बताइये !

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Hindi
|
Entertainment

Comments