कामवाली का बेटा बना कलेक्टर | Hindo Motivational Story

30 Aug 2019
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कामवाली का बेटा बना कलेक्टर 

एक छोटे से गांव में सखुबाई नाम की औरत रहा करती थी ! वह बहुत ही गरीब थी ! किराये के घर में रहते थे ! उसके पति को गुजरे दो साल हो गए थे ! उसे एक लड़का भी था ! 
उसका नाम राजेश था ! वह पढाई में बहुत ही होशियार था ! पति के गुजरने के बाद घर चलने की सारी जिम्मेदारी सखुबाई के कांधो पे आई थी ! 
साथ में राजेश की पढाई का बोझ भी था ! सखुबाई हमेशा सोचती की उसका बेटा एक दिन बड़ा अफसर बने !

सखुबाई जब काम करती तो राजेश भी उसके साथ जाता ! सखुबाई लोगोके घर जाकर बर्तन मांजती तो कही खाना बना देती तो राजेश बैठे बैठे लोगे की घर आये अख़बार को बड़े ध्यान से पढ़ता! एक दिन जब राजेश अख़बार पढ़ने लगा तो एक मालकिन ने बड़ी कुत्सित से  कहा " अरे राजेश , अख़बार पढ़के क्या बड़ा अफसर बन जायेगा ? इससे अच्छा तो  माँ के काम में हाँथ बटाओ ,,, कम कम से उसे कुछ मदत तो हो जाएगी !" इसपर राजेश बोला " मालकिन , मुझे बड़ा अफसर बनना है ! कलेक्टर बनना है ,,,हम किताबे नहीं ले सकते न इसलिए ज्यादा ज्ञान के लिए मैं अख़बार पढता हु !  " मालकिन बोली " तुम और कलेक्टर ? हा ,,,हा,,, शकल देखि है अपनी " और मालकिन जोर जोर से हंसने लगी ! सखुबाई को ये बात बहुत बुरी लगी और वे दोनों वहां से चले गए ! फिर सखुबाई ने शादियों में रोटी बनानेका काम शुरू किया ! वो अकेले ही १५ -२० किलो की रोटियां बनाती थी ! इसकेलिए वो सुबह ३ बजे से ही अपना काम शुरू कर देती थी ! उसके साथ राजेश भी उठता था और माँ को मदत करके अपनी पढाई करता था ! एक दिन अचानक मकान  मालिक उनके पास आये और बोले ! " क्या सखुबाई , तुम और तुम्हारा बेटा  ३ बजे ही उठ जाते हो और ये लाईट जलाते हो ,,,बिजली का बिल ज्यादा  आ रहा है  तुम्हारी वजह से ! एक तो बिल ज्यादा दिया करो या फिर कमरा खाली कर दो  !" और मकान मालिक  गुस्से से वहां से चले  गए ! फिर राजेश ने लालटेन जलाया और पढाई करने लगा ! माँ भी उस प्रकाश में रोटियां करने लगी !  ऐसे ही राजेश ने अगले कुछ साल जी लगाकर  पढाई की और क्लास में हमेशा अव्वल आने लगा ! राजेश की लगन देखकर अगली पढाई के लिए उसके गुरूजी ने उसे दिल्ली जाने की सलाह दी और खुद खर्चा उठाने की जिम्मेदारी ली ! राजेश तब २२ साल का हो  गया था ! फिर क्या था राजेश दिल्ली चला गया और वहाँ खूब पढाई की ! वो घंटो लायब्ररी में किताबे पढता रहता फिर एक दिन जब एग्जाम का टाइम आया तो सायकल पर  जाते जाते किसी गाड़ी वाले ने उसे ठोंक दिया ! राजेश जमीन पर गिर गया ! उसके सिर और बाये हाथ को चोट आयी ! अब वो सोचने लगा " मेरे बाये हाथ में चोट लग गयी है , और सिर से भी खून बह रहा है ,,इस हालात में अस्पताल जाऊ या एग्जाम देने ? अगर अस्पताल गया तो मेरा ये पूरा साल बर्बाद हो जायेगा और ये मेरे लिए मुमकिन नहीं है ! फिर से दिल्ली में रहने का खर्चा कौन उठाएगा !? मेरे सिर्फ बाया हाथ चोटिल है पर दाया हाथ अब भी अच्छा है मैं इस हाथ से एग्जाम दूंगा ! " और फिर राजेश वहाँ से सीधा परीक्षा केंद्र गया और परीक्षा दी !  परीक्षा देने के बाद राजेश अस्पताल में भर्ती हुआ और इलाज करवाया ! राजेश ने अस्पताल में भी पढाई जारी राखी और इंटरव्यू अटेंट किया !

फिर कुछ दिन के लिए राजेश माँ के पास गांव वापस चला आया ! कुछ दिनों बाद रिजल्ट के दिन माँ ने अख़बार खरीदकर लाया और राजेश को परिणाम देखने को कहा ! राजेश ने रिजल्ट देखा तो उसने जोर से चीख निकाली " माँ , मैं पास हो गया ! तुम्हारा बेटा अफसर बन गया ,,,मैं कलेक्टर बन गया माँ ,,,,!" ये सुनते ही माँ की आँखों में आंसू आ गए और वो दोनों रोने लगे ,,,,,,,

तो दोस्तों , क्या समझे इस कहानी से ? की हमे हमेशा अपना लक्ष्य प्राप्त करने के लिए मेहनत करनी चाहिए ! दुनिया चाहे हम पर  हँसे या मजाक उड़ाए लेकिन हमेशा अपने लक्ष्य का पीछा करना चाहिए ,,,,कामयाबी जरूर मिलती है !

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