फौजी बेटा | Fauzi Beta Story

16 Mar 2020
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फौजी बेटा

      रतन सिंह आज खुशी से फूला नहीं समा रहा था। आज भारतीय मिलिट्री से उसका सिलेक्शन लेटर आ गया था। सारी तैयारियां हो चुकी थी। रतन ने अपने बाबूजी और मां के पैर छुए। बाबूजी--बेटा जाओ भारत मां की रक्षा करना!  मां -- बेटा कल्याण हो। अपना और अपने फ़र्ज़ का ख्याल रखना! टिफिन दिया है, तेरा मनपसंद हलवा भी है, समय पर खा लेना! वहां टोकने वाला कोई नहीं होगा फिर भी इस मां को याद करके खाना ठीक से खा लिया करना।रतन--ठीक है मां चलता हूं! मां ने बेटे को गले लगा लिया, आंखें भर आई, मां को पहली बार बेटे से जुदा होना बर्दाश्त नहीं हो रहा था। उसके बाबूजी की भी आंखें नम हो गई थी।  

रतन ने अपनी ट्रेनिंग पूरी की और अपनी ड्यूटी शुरू कर दी। धीरे धीरे एक साल बीत गया। रतन छुट्टी लेकर घर आ रहा था। उसकी मां और बाबूजी बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। मां ने खाने के साथ-साथ हलवा भी बनाया। इसके बाद पूरे द्वार पर झाड़ू लगा रही थी। बाबूजी --- अब बस भी करो! मां---एक भी कचरा,कंकड़-पत्थर नहीं रहना चाहिए! मेरा बबुआ आ रहा है। रतन जैसे ही घर पहुंचा घर में खुशहाली छा गई। मां--मेरा राजा बेटा आ गया! रतन ने सभी के लिए लाए उपहार निकाल कर रख दिए! मां---बबुआ हाथ पैर धो ले पहले खाना खा ले। मां ने अपने हाथों से जब निवाला खिलाया तो रतन निहाल हो गया।

रतन--मां के हाथों की रोटियों में बड़ी लज्जत है! किसी भी और निवाले में ये मजा है कहां! 

   इस तरह हंसी खुशी से रतन की छुट्टियां बीत गई और वह जाने के लिए तैयार हुआ। रतन--बाबूजी इस बार आपके लिए एक स्वेटर और मां के लिए शॉल लेकर आऊंगा। रतन ने जाकर ड्यूटी जॉइन कर ली।कुछ महीने बीत गए। आज मां और बाबू जी से रतन ने कुछ देर तक बात की और फिर कहा-- मां,हम श्रीनगर जा रहे हैं। शाम तक पहुंच जाएंगे फिर बात करूंगा। शाम हो गई लेकिन बेटे का फोन नहीं आया। मां--बहुत देर हो गई, बबुआ का अभी तक फोन नहीं आया! बाबूजी --- मैंने फोन लगाया था तो नेटवर्क नहीं मिल रहा था।  बाबूजी ने टीवी खोला तो श्रीनगर में आतंकी हमले की न्यूज़ आ रही थी। आतंकवादियों और सैनिकों के बीच जंग जारी थी। इस जंग में चार आतंकवादियों को सेना के जवानों ने मार गिराया था। भारत मां के 2 सैनिक शहीद हो गए। रतन की मां बस अपने बबुआ के फोन के इंतजार में बार-बार मोबाइल को देखती थी।

  दूसरा दिन... मां---आज बबुआ का जन्मदिन है! आज तो उसका फोन जरूर आएगा! बाबूजी कुछ नहीं बोले अंदर चले गए।

   इतने में मिलिट्री की एक गाड़ी आ गई। बाबूजी ने देखा तो मूर्ति बन कर रह गए।  तिरंगे में लिपटे हुए अपने लाडले को देखकर उनके कलेजे पर जैसे छूरी चल गई। मां  बहुत जोर से रोई और बेहोश हो गई। अपने जन्मदिन पर रतन सिंह शहीद बनकर सामने आ गया। उसका सामान उसके बाबूजी को दे दिया गया। कुछ देर में सेना के जवान के कहने पर बाबूजी ने सामान को देखा तो उसमें उनके लिए स्वेटर और मां के लिए शाॅल भी थी। बाबूजी फफक  कर रो पड़े। उनके लिए यह सब खरीदने वाला हमेशा के लिए खामोश हो चुका था। पूरा गांव इकट्ठा हो गया था। सबकी आंखें नम हो गई।  एक लाल भारत मां के लिए शहीद हो गया लेकिन उसके अपने मां बाप को अपने बेटे पर नाज होने के साथ-साथ कभी भी न भूलने वाला असहनीय दर्द मिल गया.....

जय हिंद! जय जवान! वंदे मातरम!

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